Friday, May 1, 2020

गर्मी (दोहे)

१
नीला अम्बर देख के,बढ़ी धरा की पीर।
तपन मिटाने के लिए,बदरा लाओ नीर।

२
गर्मी से धरती तपी, सूखे नदियाँ ताल।
पेड़ों की छाया नहीं,होते सब बेहाल।

३
सूखी धरती देख के,हुआ किसान अधीर।
राह ताकते मेघ की,नयना बरसे नीर

४
कैसी ये विपदा पड़ी,हुई दुकाने बंद।
कूलर भी चलते नहीं,बने न कोई छंद।

५
गर्मी है भीषण बड़ी,लू का तीखा वार।
बदरा बरसो जोर से,सही न जाए  मार।

*अनुराधा चौहान'सुधी'*
चित्र गूगल से साभार

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