Saturday, June 6, 2020

सपूतों की जननी

बड़ी पावन पुनीता है,हमारी देश की धरती।
सपूतों की जनक जननी,सभी का पेट है भरती।
करें सेवा सदा सैनिक,तभी हम शान से जीते।
शहीदों की चिताओं पे,नयन से बूँद है झरती।

खड़े ये धूप बारिश में,सदा सुख चैन हैं खोते।
कटाते शीश ये अपना,तभी हम रैन में सोते।
सहें हर वार सीने पे,कभी पीछे नहीं हटते।
तिरंगे में लिपट सोते,विदाई देख हम रोते।

सहें पीड़ा जुदाई की,धरा पे वीर की माता।
धरा की आन की खातिर,पिया ये विष सदा जाता।
झुका दे ये सभी आँखें,धरा की ओर जो उठती।
डटे दीवार बन के ये,न तोड़ें देश से नाता

कहानी वीर की जग में,न कोई भूल पाएगा।
शहीदों की चरण धूली,सदा माथे लगाएगा।
खड़े दीवार बन के ये,तभी हम चैन पाते हैं।
करो सम्मान सब इनका,तिरंगा मुस्कुराएगा।
***अनुराधा चौहान'सुधी'***
चित्र गूगल से साभार

9 comments:

  1. भारत माता की जय 🙏

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    1. धन्यवाद अपर्णा जी और नीता जी

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  2. हृदय स्पर्शी सृजन सखी.
    नमन वीर सपूतों को 🙏

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  3. वाहहह! शानदार रचना👌👌👌👌👌

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  4. देश की शौर्य गाथा की सुन्दर रचना।

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