Thursday, July 1, 2021

सुखी सवैया

 

*१--मनमंदिर*

अति घोर बढ़े अपवाद बने,

सुविचार छुपें इनकी बदली घिर।

करना मत लालच संगत को,

कुविचार सदा उपजे मन में फिर।

मनु दंभ भरे लगते सब ही,

फिर नाच करें चढ़के सचके सिर।

हित में सबके फिर काम करो,

शुभ दीप जला अपने मनमंदिर।


*२--अभिमान*

अभिमान तजो सच राह चलो,

रुकना मत कंटक देख कहीं पर।

सबके मनसे मत काम करो,

अब छोड़ सभी मन में बसते डर।

सब सोच-विचार प्रयास करो,

मत आस रखो बनके अब निर्भर।

विश्वास बढ़े जब अंतस में,

भगवान सदा वर दें खुश होकर ।


*३-उपहास*

उपहास सदैव विवेक हरे,

क्षण में करता सबके मन आहत।

अपमान प्रहार कड़े करता,

मन को करता पल में तगड़ा क्षत।

तज आज विकार सभी मन के,

शुभ भाव बसे मनके शरणागत।

उपहार सदैव मिठास भरे,

सब रोज प्रणाम करें झुक के नत।


*४-चिड़िया*

तिनका मुख ले उड़ती चिड़िया,

नवजीवन का फिर नीड़ बनाकर ।

जब अंश नया उसमें पनपे,

किलके फुदके फिर बैठ तना पर।

नव कोमल पंख उगे तन पे,

फिर छोड़ रहा मन से अपना डर। 

चहके उछले वह डाल सभी,

 नभ में उड़ता नयनों सपना भर।

*अनुराधा चौहान'सुधी'*


सुखी सवैया नवीन सवैया 8 सगण+लघु लघु से बनता है; 12, 14 वर्णों पर यति होती है। 

112 112 112 112, 112 112 112 112 11

*अनुराधा चौहान'सुधी'✍️*

2 comments:

  1. सार्थक संदेश देते प्यारे छंद ।

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    1. हार्दिक आभार आदरणीया

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